राजस्थान सुजस ई-बुलेटिन
(Rajasthan Sujas E-Bulletin)
24-07-2026
राजस्थान जल कॉन्क्लेव 2026 (Rajasthan Water Conclave 2026): जल आत्मनिर्भरता की ओर कदम
राजस्थान सरकार ने जुलाई 2026 में ‘राजस्थान जल कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य मरुस्थलीय राज्य में जल संकट का समाधान करना और जल सुरक्षा (Water Security) सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव’ (Rajasthan Water Conclave) में प्रदेश को जल-क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का खाका (Blueprint) प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान संचालित किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु और परियोजनाएं:
रामजल सेतु लिंक परियोजना (Ramjal Setu Link Project):
यह राजस्थान के जल इतिहास का एक नया अध्याय है। यह परियोजना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का ही एक विस्तृत और संशोधित रूप है।
लाभ: प्रदेश के 17 जिलों में पेयजल (Drinking Water) सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
सिंचाई: लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना):
राज्य सरकार पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में पेयजल और सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए इस परियोजना पर तेजी से कार्य कर रही है।
यमुना जल समझौता (Yamuna Water Agreement):

विवरण: हरियाणा और राजस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता।
तकनीक: लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से 1,917 क्यूसेक यमुना का पानी शेखावाटी क्षेत्र में लाया जाएगा।
लाभार्थी: सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों के लगभग 75 लाख लोगों को स्थायी पेयजल मिलेगा।
देवास परियोजना (Dewas Project III & IV):
उदयपुर शहर की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 1,691 करोड़ रुपये की लागत से कार्य जारी है।
परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना (Parwan Multipurpose Project):
इसे कोटा, बारां और झालावाड़ की ‘जीवनरेखा (Lifeline)’ कहा जाता है।
इसी प्रकार पश्चिमी राजस्थान के लिए आईजीएनपी के नहरी क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। नर्मदा के पानी को रानीवाड़ा और भीनमाल तक पहुंचाने और ब्राह्मणी नदी के पानी को बीसलपुर तक लाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
जल संरक्षण हेतु राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के साथ ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से चल रही निम्नलिखित योजनाओं पर जोर दिया:
कैच द रेन (Catch the Rain):
‘जहाँ भी गिरे, जब भी गिरे, वर्षा का पानी बचाएं’। राज्य में वर्षा जल को बचाने के लिए नए बांधों और नहरों की लाइनिंग (Lining) का कार्य किया जा रहा है ताकि पानी का रिसाव (Seepage) न हो।
अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana):
सामुदायिक भागीदारी के साथ गिरते भूजल स्तर को रोकना। राजस्थान में इसके तहत 485 करोड़ रुपये के कार्य हुए हैं।
जल जीवन मिशन (JJM):
15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को ‘नल से जल’ उपलब्ध कराया गया है।
अमृत 2.0 (AMRUT 2.0):
शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन के लिए इस मिशन के तहत व्यापक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास किया जा रहा है। इस योजना के तहत 178 शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) के लिए पेयजल सुदृढ़ीकरण हेतु 5,100 करोड़ रुपये स्वीकृत।
थार के मरुस्थल में ‘कृत्रिम समंदर’: बुर्जी 1356 जलाशय
जैसलमेर-बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में जल प्रबंधन का एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया गया है। जैसलमेर के घंटियाली क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के अतिरिक्त जल को सहेजने के लिए आरडी-1356 पर एक विशाल कृत्रिम झील (Artificial Lake) का निर्माण किया गया है।

- स्थान: इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की मुख्य नहर के RD-1356 (बुर्जी 1356) पर।
- संरचना: यह एक एस्केप रिजर्वायर (Escape Reservoir) है।
- उद्देश्य: मानसून के दौरान पंजाब की ओर से आने वाले अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान जाने से रोकना और उसे स्टोर करना।
- मानसून के समय जब सिंचाई की मांग घट जाती है, तब भारी मात्रा में पानी संग्रहण व्यवस्था के अभाव में अंतरराष्ट्रीय सीमा से बहकर बेकार चला जाता है।
- इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में चार एस्केप रिजर्वायर जल जीवन मिशन के तहत सतासर (बीकानेर) में आरडी-507 के पास, गजनेर लिफ्ट परियोजना क्षेत्र (बीकानेर) में आरडी-750 के पास, जोधपुर जिले में आरडी-1121 के पास और जैसलमेर जिले में बुर्जी 1356 जलाशय बनाने की योजना को मंजूरी दी गई थी।
- लम्बे समय से सुस्त पड़ी इस योजना में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इनके काम में तेजी आई और अब तक आरडी- 507 एवं बुर्जी 1,356 एस्केप रिजर्वायर का काम पूरा हो चुका है।
- विशेषताएं:
- परिधि: 28 किलोमीटर।क्षमता: 1,406 MCFT जल संग्रहण क्षमता के साथ यह जैसलमेर और बाड़मेर के 20 लाख परिवारों के लिए जीवन रेखा साबित होगी।
- तकनीक: रिसाव (Seepage) रोकने के लिए तली में HDPE (High-Density Polyethylene) शीट बिछाई गई है।
- प्रभाव: जैसलमेर और बाड़मेर जिलों की पेयजल और सिंचाई की मांग पूरी होगी। नहरबंदी (Canal Closure) के समय यह जलाशय ‘सुरक्षित जल भंडार’ का काम करेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: WHO अवार्ड 2026
राजस्थान को तंबाकू नियंत्रण (Tobacco Control) के प्रयासों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस अवार्ड-2026’ (World No Tobacco Day Award-2026) से सम्मानित किया है। राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस.एन. धौलपुरिया ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रभावी जन-जागरूकता अभियानों को दिया।
- पुरस्कार: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस अवार्ड-2026′।
- उपलब्धि: दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (South-East Asia Region) में राजस्थान प्रथम स्थान पर रहा।
- प्रमुख पहल: राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता।
विकास भी, विरासत भी: आस्था धामों का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने राजस्थान धरोहर प्राधिकरण की बैठक में प्रमुख मंदिरों के विकास के निर्देश दिए:
- ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर): कॉरिडोर का निर्माण और सरोवर परिक्रमा मार्ग का विकास।
- तनोट माता मंदिर: जैसलमेर।
- पूंछरी का लौठा: डीग।
- खाटू श्याम जी (सीकर): सौन्दर्यीकरण और सुगम आवागमन हेतु सड़कों का निर्माण।
- बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर): स्टैच्यू, धर्मशाला और घाटों का निर्माण।
- रामदेवरा (जैसलमेर): मेले के दौरान पदयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं।
- पैनोरमा (Panorama): प्रदेश के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाले पैनोरमाओं का संरक्षण और स्कूली विद्यार्थियों का भ्रमण।
पंच गौरव कार्यक्रम: डीडवाना-कुचामन जिला
डीडवाना-कुचामन जिला नमक उत्पादन (डीडवाना), संगमरमर (मकराना) और कुचामन किले के लिए प्रसिद्ध है। जिले में सबसे अधिक खारे पानी की झीलें हैं। डीडवाना को शेखावाटी का तोरणद्वार और मारवाड़ का सिंहद्वार कहा जाता है।

सरकार की ‘पंच गौरव’ पहल के तहत प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान को वैश्विक मंच दिया जा रहा है। डीडवाना-कुचामन जिले के संदर्भ में विवरण निम्नलिखित है:
| श्रेणी | विवरण | वैज्ञानिक नाम / विशेष तथ्य |
| एक जिला-एक उपज | मीठा प्याज | एलियम सेपा (Allium cepa) डीडवाना-कुचामन जिले का प्याज अपने बड़े आकार, मीठे स्वाद और कम तीखेपन के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां का प्याज न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है बल्कि बांग्लादेश, मलेशिया, नेपाल और श्रीलंका तक निर्यात भी होता है। |
| एक जिला-एक वनस्पति | खेजड़ी | प्रोसोपिस सिनेरिया (Prosopis cineraria); राजस्थान का राज्य वृक्ष। इसे ‘मरुस्थल का राजा’ एवं राजस्थान का कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। यह अत्यंत विषम परिस्थितियों (Extreme weather) में भी जीवित रहता है।इसके फल को सांगरी कहा जाता है, जिसकी स्वादिष्ट और प्रसिद्ध पारंपरिक सब्जी बनाई जाती है।धार्मिक जुड़ाव: बिश्नोई समाज द्वारा इस वृक्ष की रक्षा के लिए ‘खेजड़ली बलिदान’ दिया गया था। |
| एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) | मकराना मार्बल एवं ग्रेनाइट उत्पाद | विश्व प्रसिद्ध ‘मकराना मार्बल (संगमरमर)’ का मकराना, बोरावड, गुणावती, बिदियाद, कोलाडूंगरी, मोरेड़ और बिल्लू ग्राम में खनन होता है। मकराना मार्बल अपनी स्थाई चमक, मजबूती और प्रदूषण एवं वातावरणीय प्रभावों से अप्रभावित रहने की विशिष्टता के कारण विश्व स्तर पर ख्यात है। प्रसिद्ध ताजमहल (Taj Mahal) और कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल का निर्माण इसी पत्थर से हुआ है।मकराना मार्बल को ‘ग्लोबल हेरिटेज स्टोन रिसोर्स’ (Global Heritage Stone Resource) का दर्जा प्राप्त है। |
| एक जिला-एक पर्यटन स्थल | डीडवाना झील | सांभर के बाद दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील। सर्दियों में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, जिससे यह पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती है। सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील और एक महत्वपूर्ण रामसर साइट (Ramsar Site) है। |
| एक जिला-एक खेल | बास्केटबॉल | जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय। |
विशेष तथ्य: डीडवाना को ‘शेखावाटी का तोरणद्वार’ और ‘मारवाड़ का सिंहद्वार’ कहा जाता है।
कृषि और सिंचाई में तकनीकी समावेशन
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) – राजस्थान में प्रभाव
“हर खेत को पानी” और “प्रति बूंद अधिक फसल (Per Drop More Crop)” के लक्ष्य के साथ राजस्थान में सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) को बढ़ावा दिया जा रहा है:
- सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation):
- ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर (Drip & Mini Sprinklers) के लिए 1.94 लाख किसानों को 1,032 करोड़ रुपये का अनुदान (Subsidy)
- 2.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र इसके तहत कवर किया गया।
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure):
- संरचनात्मक विकास: कृषि क्षेत्र में जल संरक्षण हेतु फार्म पोंड (Farm Ponds) और डिग्गी निर्माण (Diggi Construction) पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
- 35,368 फार्म पोंड (Farm Ponds) का निर्माण।12,476 डिग्गियों का निर्माण।
- 32,918 किमी सिंचाई पाइपलाइन।
- संरचनात्मक विकास: कृषि क्षेत्र में जल संरक्षण हेतु फार्म पोंड (Farm Ponds) और डिग्गी निर्माण (Diggi Construction) पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
- उद्यानिकी (Horticulture):
- ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए भारी अनुदान।

💡 परीक्षा के लिए अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
- संविधानिक संदर्भ: जल ‘राज्य सूची’ (State List) का विषय है, लेकिन अंतर-राज्यीय नदी विवाद ‘संघ सूची’ के अंतर्गत आते हैं।
- अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल से संबंधित विवादों का न्यायनिर्णयन।
- GI टैग (Geographical Indication): मकराना मार्बल को उसकी विशिष्टता के लिए GI टैग प्राप्त है।
- राज्य प्रतीक:
- राज्य पक्षी: गोडावण (Great Indian Bustard) – ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) श्रेणी में।
- राज्य पशु: चिंकारा (Wild) और ऊंट (Livestock)।
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